कहानी

मेरी कहानियां मेरे दोस्तों को कई बार आहत कर देती हैं. कई बार दोस्त फ़ोन करते है ओर शिकायत करते हैं, “तुझे बताया था, इसलिए नहीं कि तो सबको बता दे” असल में होता यह है कि मे हर बातचीत मे कहानी ढूढ़ता रहता हूँ; लेकिन स्वयं कि बहुत सी अनुभूतियाँ तथा संवेदनायें यदि सीधे-सीधे लिखूं तो बहुत से दोस्तों को आहत कर बैठता हूँ. इसलिए गल्प का सहारा लेता हूँ; लेकिन फिर भी वो तो जान ही लेता है जिसका वाकया मैं कहानी बना डालता हूँ.

बहुत छोटी छोटी घटनाओं को लेकर छोटी छोटी कहानियां, जिसे एक बैठक में पढ़ा जा सके, लिखता हूँ. यह कहानियां है भी या नहीं मैं नहीं जानता.


कहानी

 
वो-वाकया  
 कहानी-२-सब-उलझा-हुआ-है-भाग-१