Poem XV: चुनाव का मौसम आया (लम्बी कविता)


For part I of the poem : https://sachinmanan.wordpress.com/2014/03/21/poem-xiv

For part II of the poem : https://sachinmanan.wordpress.com/2014/03/20/poem-xii

सैलाब के समय में

इन्द्रसभा में एक मामला आया था

मंगल पर जीवन अंकुर फूटना चाहिए या नहीं?

किन्तु

नए कार्यालयों को कार्यान्विन्त करने के चकार में

यह मामला बीच में ही अटक गया

 

धरती वासी विस्मित न हो

‘अटकना’

यह कला इन्द्रसभा ने हम से ही सीखी है

 

 

कार्यालय तो तब से अब तक कई खुले हैं

समस्या कि विकटता और पांच साल के भीतर निवारण से

पार्टी पार्टीकोश को क्या फायदा होगा

यह सबसे बड़ी कसोटी होती है

सब जानते हैं इस विषय पर बहस फज़ूल होती है

 

मसीहा अवतार पैगम्बर कार्यालय के अंतर्गत

एक नया कार्यालय पिछली ही सदी में खुला है

यह कार्यालय परिस्थितियों को ध्यान रखकर

कार्यसूची तैयार करता है, फिर पाठयक्रम में तब्दील कर

प्रोढ़ अवतार मसीहा को पढ़ाया भी जाता है

आश्चर्य

पाठ के अंत में बार बार

ॐ शांति का पाठ दोहराया जाता है

 

धरती वासी विस्मित हों, पूछें मुझसे

“अचरज  कैसा?”

मैं कहूंगा

शांति का पाठ पढ़ाया गया क्रांतिकरियों को

शांति और क्रांति के बीच

यह लटकते नहीं रह जायेंगे

कभी दायें

कभी बायें

कभी दायें

कभी बायें

तो कभी कहीं नहीं

यह ही न करते रह जायेंगे

 

इलाज है इसका भी तर्कशक्ति के पास

आप महाराणा कि संतान है

यकीन जानिए शुद्ध फौलाद हैं

अच्छा नहीं तो बुरा भी न कहिये

जाइये संकट मोचन का पाठ करिये

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर

जय कपिश …..

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