सपना – 21


आज का सपना:
मैं स्कूल की रीयूनियन मे खड़ा हूँ, निक्कर मे, खाकी रंग की निक्कर! पीछे दुष्यंत कुमार की कविता कोई गा रहा है; “हो गयी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए”
तभी एक दोस्त मसान फिल्म का गाना गता है , “तू रेल सी गुजरती है मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ ”
फिर कहता है, यह भी दुष्यंत की रचना है; तुम्हें क्या प्रेम से बदहजमी है

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