प्रेमचंद का उपन्यास – गोदान


गोदान, प्रेमचंद  का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास  माना जाता है। कुछ लोग इसे उनकी सर्वोत्तम कृति भी मानते हैं।गोदान हिंदी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्वलतम प्रकाशस्तंभ है। गोदान के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत की एक विशेष संस्कृति को सजीव और साकार पाते हैं, ऐसी संस्कृति जो अब समाप्त हो रही है या हो जाने को है, फिर भी जिसमें भारत की मिट्टी की सोंधी सुबास भरी है। प्रेमचंद ने इसे अमर बना दिया है।

उपन्यास का सारांश

 

हिन्दी के सर्वोत्तम साहित्यकारों में से एक उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखा गया गोदान हिन्दी के ही नहीं वरन संसार की किसी भी भाषा के सबसे अच्छे उपन्यासों में से एक माना जाता है। तत्कालीन भारत की सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को एवम उस समय के गरीबों पर हो रहे शोषण को उजागर करने वाला ये उपन्यास मुंशी प्रेमचंद का अंतिम पूर्ण उपन्यास है। होरी मेहतो और उसके परिवार के अन्य सदस्यों जैसे धनिया, रूपा, सोना, गोबर और झुनिया की कहानी सुनाने वाला ये उपन्यास जातिवाद, पूंजीवाद जैसी अनेक समस्यायों एवम उनके गरीब नागरिकों पर पढ़ने वाले प्रभाव को भी दर्शाता है।

गोदान को आप डाउनलोड भी कर सकते हैं – क्लिक करें और पीडीऍफ़ फॉर्मेट  मे सेव करें :

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5 thoughts on “प्रेमचंद का उपन्यास – गोदान

    • प्रेमचंद जी की कालजयी रचना, हिंदी गद्य का महाकाव्य … होरी – धनिया के माध्यम से भारतीय कृषक का चित्रण .. सचमुच अदभुत

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