सपना ३६

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पहले भी ऐसा ही होता था… पहले भी ऐसा ही होता था… पहले भी ऐसा ही होता था… पहले भी ऐसा ही होता था… पहले भी ऐसा ही होता था… पहले भी ऐसा ही होता था… पहले भी ऐसा ही होता था… पहले भी ऐसा ही होता था…
बस सारी रात हर तरफ से यही आवाज़ आती रही; मै कुछ भी बोलूं बस जवाब मे यही आवाज़ – पहली भी यही होता था…
थोड़ी देर बाद मैंने उठकर पानी पिया, फिर लेटा – नींद आयी लेकिन सपना नहीं आया – सुबह उठकर सोचा यार यह तो पहली बार हुआ की रात सपना नहीं आया

सपना ३५

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एक झाड़ू खरीद कर लाया हूँ; फूल झाड़ू… घर लौटता हूँ तो बीवी झाड़ू देखकर कहती है; “यह क्या है? इतना छोटा झाड़ू क्यों उठा लाये.. कहाँ से लाये हो?” मैं जवाब देता हूँ, “FABINDIA ” का झाड़ू है, अमीर लोग सब छोटा छोटा ही लेते हैं… तभी कामवाली सुशीला बोलती है, “नहीं साहब छोटे झाड़ू बनाने के पीछे कारण यह है की कामवाली बाई अगर झाड़ू लम्बा हो खड़े खड़े ही झाड़ू लगा देती है… अब मालकिन ने क्या करना शुरू किया है की छोटे झाड़ू लेट हैं; कामवाली के पास कोई चारा नहीं बैठकर ही लगाना पड़ेगा… या तो नौकरी छोड़ो या सहो !!!” मैं बीवी की तरफ देखता हूँ; वो गुस्से मे कहती है; “तुम भी कुछ भी ले आते हो, जाओ लम्बा वाला ही ले आओ” …. और फिर चुपके से फुसफुसाती है, “काम छोड़ दिया तो क्या करेंगे?”

सपना ३३

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देखता हूँ एक डाक्टर बैठा है और उसके टेबल के आगे एक लम्बी लाइन लगी हुई है … हज़ारों हज़ारो लोग… सीलसेवार तरीके से लोग आ रहे हैं, डॉक्टर उनका दिल खोलता है, उसमे से भगवान् निकाल कर उसकी जगह गाय रख रहा है… भगवान् बड़े दुःख से पूछते हैं “क्यों भाई? मैं तो सदियों से इसी घर में रहता हूँ, मुझे निकाल क्यों रहे हो? मेरे पास घर के पेपर भी हैं भाई – फ्री होल्ड के पेपर…” डॉक्टर कह रहा है, “गाय भी तो भगवान् है उसको भी तो घर चाहिए… और तुम तो खुद भी चरवाहे रहे हो, गाय – बकरी मे तुम्हे क्या रब नहीं दीखता?” तभी लाइन में चलता हुआ एक मुसलमान डॉक्टर तक पहुँचता है… डॉक्टर पीछे मुड़कर किसी से पूछता है – “साहब इनके भी खुदा बदलने हैं?” …. खुदा बदलने की बात सुनते ही मैं डरकर उठ जाता हूँ

कविता

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पीछे छूटा बचपन हर शाम बगल मे बैठ पूछता है – तो कहाँ पहुंचे ?
और मेरे बच्चों को मैं “वहां” पहुँचने की हिदायतें दिया करता हूँ

सपना ३४

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फिल्लौरी देख कर सोया था शायद इसलिए या फिर शायद किसी और कारण से सपने में एक भूत आया … भूत भी अजीब.. कभी औरत की आवाज़ में बात करे कभी मर्द की … जैसे छुपाना चाहता हो की आखिर वो है कौन. बात भी अजीब, बात कम और सवाल ज्यादा – “तुम पुणे क्यों नहीं गए?” “क्या अपने दोस्तों और भाइयों का साथ देना तुम्हारा फ़र्ज़ नहीं ?” … “लेकिन मै कांग्रेसी नहीं और मुझे इंदु सरकार से कोई परेशानी नहीं … मुझे तो पता भी नहीं की फिल्म मे है क्या” … “पता तो उनको भी नहीं जो पुणे मे हैं……” जोर जोर से हसने की आवाज़ आती है और देखता हूँ भूत दो भागों मे बंटकर खुद को ही गले लगाकर और जोर से हंसने लगता है….

सपना ३२

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इंडिया गेट पर खड़ा हूँ; सामने पटरी पर कुछ लोग बैठे हैं; चर्चा GST पर है; सभी जवान हैं (जवान चाहे सेना में हो चाहे पटरी पर देशभक्ति मे डूबा रहता है) और बातों मे गर्मी, जोश और आशा है … साथ ही पटरी पर एक आदमी अपनी दूकान लगाए बैठा है – छोटे छोटे खिलोने बेच रहा है – लेकिन सबसे शानदार वो खिलौना है – वो छोटा कुत्ता जो लगातार अपना सर “I AGREE ” वाले तरीके से हिलाता चला जा रहा है …..समझ नहीं आता कुत्ता किस बात पर स्वकृति ठोक रहा है??

सपना ३१ :

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महामहिम अमित शाह जी का काफिला निकल रहा है… सबसे आगे महामहिम की गाडी है; किसी को पता भी नहीं चलता और अचानक से एक गाय दौड़ती हुई महामहिम की गाडी के आगे आत्महत्या के इरादे से कूद जाती है. चारों तरफ अफरातफरी मच जाती है…. महिला पुलिस को (क्योंकि गाय स्त्रीलिंग है) बुलाकर गाय को पकड़ा जाता है; इन्क्वारी कमिटी गाय से पूछती है; “आखिर क्यों? क्या आपको पता नहीं था माताजी; की महामहिम की गाडी आ रही है? – क्यों करना चाहती हैं आप आत्महत्या??” गाय को कुछ समझ नहीं आता – वो बार बार दोहराती हैं; “भैया मैं तो सिर्फ सड़क पार कर रही थी – गाडी मुझे लगी भाई मैं गाडी को नहीं”
गाय को IPC की धारा ३०९ के तहत १ साल की सजा दी जाती है… नींद खुलते ही मैं तेज आवाज में कहता हूँ – “भारत माता की जय, गाय माता की जय, महामहिम के साथी की जय”