लघु कथा १०


लघु कथा १०


पहला बोला “मेरे पास ४ गुल्लक थीं, मैंने चारों तुड़वा दी और बैंक में जमा करवा दीं – ठीक किया न ?”

दूसरा बोला “मेरी बीवी के पास से काफी धन निकला – उसने सारा बैंक मे जमा करवा दिया – ठीक किया न ?”

तीसरा लोकल सेठ था – नोटेबंदी के बाद कंगला हो गया था, बोला ” बहुत बढ़िया किया भाई, देखो वो और बात है की साल भर में ही दो हज़ार के उस जादुई नोट, जिसमें जी टीवी और आजतक आदि ने gps chip लगवाई थी, की खेपें बांग्लादेश से आ रही हैं – लेकिन तुमने बहुत अच्छा किया”

तीनो खूब जी भरके हँसे और उसके बाद कनाट प्लेस के गोल चक्कर के बीचो बीच लगे झंडे पर सलाम ठोकते हुए बोले – “मेरा देश बदल रहा हैं आगे बढ़ रहा है”

One thought on “लघु कथा १०

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