सपना ४८


सपना ४८


रात का दूसरा कोना आ गया है और अभी तक सपने का नामोनिशान नहीं; मैंने खुद को पुछा, “आज सपना क्यों नहीं देख रहा”… इससे पहले की वो जवाब देता एक नयी मर्सेडीज़ बेंज जी ६३ गाडी सपने मे आकर खड़ी हो गयी; चालक की लम्बी दाढ़ी थी, कार का रंग एकदम हरा – धुआं भी हरा छोड़ रही है .. तभी ड्राइवर सीट से आवाज़ आती हैं, “अरे भाई श्री श्री चल बैठ यार, निकलना है – भारत की नदियों को बचाना है”
“लेकिन इतनी देर कहाँ लग गयी तुझे?” श्री श्री पूछते हैं
“यार गाड़ी रंगवा रहा था – हरे रंग की गाडी बढ़िया रहेगी – सही मैसेज जायेगा !! – और धुआं भी रंगीन हैं इसका – खालिस हरा ”
“बढ़िया किया जग्गी – अब लगती है न यह जग्गी “the satguru ” दी गड्डी” श्री श्री बोले और गाड़ी में बैठ गए .
४ * ४ गाड़ी यमुन्ना के घाट पर कहाँ फसने वाली थी … फररर से निकल पड़ी

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