लघु कथा २२


लघु कथा २२


पहला : वासुदेव कुटुम्भकम
दूसरा : बिलकुल सही, “दुनिया एक परिवार ही तो है ”
तीसरा : और परिवार वाले एक दुसरे के साथ फोटो तो खिचवाते ही हैं
पहला : और यह देखो फिरंगियों को, हमने कहा फोटो खिचवाओ भाभी और …
दूसरा : भाभी बुरा मान गयी; भैया लड़ने लगे
तीसरा : फिर तुमने क्या किया
पहला : फिरंगियों के जुल्म नहीं सहने वाले हम अब
दूसरा : देश आज़ाद हैं भाई; हमने भी दो लगा दिए
तीसरा : लेकिन फिर “वासुदेव कुटुंभ्कम” का क्या हुआ ?
पहला : अबे ! क्या हुआ ? साले हमने तो बोला भाभी को “दुनिया एक साँझा परिवार है, नहीं मानी वो”
दूसरा : फिर क्या करते, जुल्म सहते क्या ?
तीसरा : लेकिन तुमने मारा क्यों ?
पहला और दूसरा : अबे ! तू भी मिल गया फिरंगियों के साथ !! भाग यहाँ से
और तीसरा चुप चाप चलता बना…….

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