!! स्वागत है 2017 : अलविदा 2016 !!

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साल मोमबती सा
पिघलता रहा

और हमने
उसके कुछ आखरी क्षणों में
एक नयी मोमबती
उसी की लौ की मदद से
उसी पर टिका दी

साल नया आया और साल पुराना
उसी में घुलमिल सा गया

 

नशा

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25-dec

जनता हूँ
यह जो आजकल
कुछ आवाजें सुनता हूँ आसपास
मौत है

जनता हूँ
खुद को राख होते देखना
है सजा उस जुर्म की
जो मैं जनता था मैं कर रहा हूँ

जनता था वह मौत है
पर मैंने उसे काश भर काश
बड़े अंदाज से पिया
तुझसे बचने के लिए बेहोश रहा – जिंदगी

पर जनता हूँ
तुझे मुश्किल रस्ते बनाने के जुर्म में
कोई सजा नहीं मिलेगी
और
उनपर चलने से इंकार करने की सजा
मैं भुगत रहा हूँ

25-dec 2

शेरा वाली माता की जय

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“मीरा भोजन कर
धीरे धीरे भोजन कर
भोजन करके भजन भी कर”

मास्टर जी भजन क्या होता है

इसपर हमें तमाचा पड़ा
भजन का अर्थ गुप्त कोष में ही रहा

बड़ा होकर हमने कद पाया
धंधे का जब समय आया
तो विद्वान ने समझाया
‘सचिन’ भजन कर
बड़ा ही चालू धंधा है
साथ में चंदा है
भोजन भी मिल जाता है
यानी पेट भर जाता है

भजन का अर्थ

बीच सड़क तम्बू लगवाओ
दो दबंग तीन चार महिलाओं को बिठाओ
गाला फाडू कान उखाड़ू आवाज निकलवाओ
लॉउडस्पीकर प्रयोग में लाओ

भजन सुनाऊ?

तड़ तड़ ताड़ ताड़ ताड़
धुम धुम धूम धूम धूम
तड़ ताड़ धुम धाम धाम

शेरा वाली माता की जय

poem 1

Poem XX: स्मृतियाँ

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बंद दरवाजे के भीतर

पुरानी स्मृतियाँ

सरसराहट पैदा करती हैं

 

मनो पुराने फैसले पर

कहकहे लगा रही हों

और कह रही हों

‘हम पहले से न कहती थीं?’

विल वर्क फॉर फ़ूड

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Poem 2

माँ कहती है
गरीबो की मदद किया करो
मैं जेब की चिल्लड़
कभी कभी बाँट दिया करता हूँ

पिताजी उनके हक़ मैं मोर्चे किया करते हैं

दोस्त केले वाले का टोकरा
उनके सर पर रखवा कर दुआ ले लेते हैं

नेताओं ने स्कीम बहुत सी निकाली हैं
शायद भला भी हुआ हो

बाकि बात सिर्फ इतनी है
चुगने वाले ज्यादा हैं
और
चुगने को दाने बहुत कम

poem 3

Poem XVIII: बहुत समय हुआ अब कलयुग भोगते

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समय यदि गोलाकार पथ पर परिक्रमा करता है

तो

मैं चाहूंगा कि आज के दिन उसकी परिक्रमा पूर्ण हो

 

फिर कल से वह जब अपनी नयी परिक्रमा प्रारभ करेगा

तो पुनः सतयुग का प्रारभ होगा

बहुत समय हुआ अब कलयुग भोगते

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