लघु कथा -2

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मान लो की कभी किस्मत ने साथ दिया, या मान लो की कभी ईश्वर ने मान ही ली मेरी प्रार्थना और जो घिरा रहता हूँ हमेशा सेल्फ- डाउट मे उससे आज़ाद कर भी दिया तो भी पुख्ता यकीन है मुझे की मैं खुद को इस भवँर से आज़ाद नहीं पाऊंगा.
और ऐसा इसलिए होगा की मुझे लगेगा मैं सपना देख रहा हूँ; क्योंकि अब जो ४० साल में नहीं हुआ और जो होने का ख्वाब रोज देखता हूँ वो हो ही गया तो सपना ही लगेगा
और एक बात तो मैं जनता हूँ की मैं अकेला नहीं हूँ; मेरे जैसे आप भी तो हो
इसलिए
आपको आपका और मुझे मेरा सपना मुबारक; आपको आपका और मुझे मेरा भंवर भी मुबारक

लघु कथा – 3

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युगपुरुष ने बिहार चुनाव के समय व्यंग्यात्मक स्वर मे पुछा था, बिजली आईईईई
मुझे भी पूछना है युगपुरुष के भक्तों से
नोटबंदी से क्या कॉर्पोरेट पारदर्शिता आई
आर्थिक पारदर्शिता आई
राजनैतिक पारदर्शिता आईई ई ई ई ..

लघुकथा -1

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लघुकथा :
राजा ने प्रजा को ५० कोड़े मारने का आदेश दिया. प्रजा ने कहा क्यों ? राजा ने कहा चोरी बढ़ गयी है; चोर तुम लोगों मे से ही कोई है.. सबको ५० कोड़े पड़ेंगे तो चोर को अपने आप लग जायेंगे
प्रजा ने राष्ट्रहित मे ५० कोड़े खा लिए. उसके बाद पुछा, क्या हासिल हुआ मालिक ?? राजा ने कहा अब देखना चोरी बंद हो जाएगी
प्रजा दर्द मे थी लेकिन फिर भी मुस्कुरा उठी
राजा ने कहा, देखा सब ठीक है